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 शिक्षक रमेश जी – “पापा… आप इस बार घर कब आओगे?”

जब शिक्षक चुप रहते हैं…

तब उनकी समस्याएँ भी चुप हो जाती हैं

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Twitter (X) अब केवल सोशल मीडिया नहीं… बल्कि शिक्षकों की सामूहिक आवाज़ बन चुका है।

राजस्थान के एक छोटे से गाँव में रहने वाले शिक्षक रमेश जी पिछले 12 वर्षों से अपने परिवार से दूर नौकरी कर रहे थे। हर त्योहार पर उनके बच्चे फोन पर सिर्फ एक ही सवाल पूछते थे…

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“पापा… आप इस बार घर कब आओगे?”

लेकिन रमेश जी के पास हर बार वही जवाब होता — “बेटा… अभी ट्रांसफर नहीं हुआ।”

धीरे-धीरे उनके माता-पिता बूढ़े हो गए। बच्चे बड़े होने लगे। और जिंदगी फाइलों, आदेशों और इंतज़ार के बीच कहीं खोती चली गई।

“हर साल उम्मीद आती है… और फिर फाइलों में दब जाती है…”

स्टाफ रूम में हर दिन ट्रांसफर, DPC, अवकाश और पदोन्नति की बातें होती थीं। हर शिक्षक परेशान था। लेकिन आवाज़ बिखरी हुई थी।

एक दिन उनके साथी शिक्षक ने कहा — “अब समय बदल गया है… Twitter (X) पर हजारों शिक्षक एक साथ बोल रहे हैं।”

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शुरुआत में रमेश जी को लगा कि एक ट्वीट से क्या होगा? लेकिन फिर उन्होंने देखा — जब हजारों शिक्षक एक साथ पोस्ट करते हैं, तो मीडिया खबर चलाता है, अधिकारी जवाब देते हैं, और सरकार तक बात पहुँचती है।

उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि — आज के समय में चुप रहना भी एक तरह की हार है।

उन्होंने भी Twitter (X) अकाउंट बनाया। धीरे-धीरे वे हजारों शिक्षकों से जुड़ गए। अब वे अकेले नहीं थे।

उन्हें समझ आ गया कि — अगर शिक्षक समाज खुद अपनी आवाज़ नहीं उठाएगा, तो कोई और उनकी लड़ाई पूरी ताकत से नहीं लड़ पाएगा।

अंतिम संदेश

यदि हम अपने अधिकारों, सम्मान और भविष्य के लिए घर बैठे एक ट्वीट भी नहीं कर सकते, तो फिर बदलाव की उम्मीद केवल दूसरों से करना उचित नहीं होगा।

“एक शिक्षक नहीं…
अब पूरा शिक्षक समाज बोले।”
— Apni Govt

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