वीर बाल दिवस पर भाषण
“इतिहास गवाह है कि जब साहस और सत्य एक साथ खड़े होते हैं, तब उम्र नहीं, हौसला बोलता है।”
नमस्कार।
मैं कक्षा 10 की छात्रा अंकिता आप सभी के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत करना चाहती हूँ।
आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय,
मेरे प्रिय गुरुजनों एवं मेरे प्यारे साथियों,
जैसा कि आप सभी को ज्ञात है, आज हम यहाँ वीर बाल दिवस के आयोजन हेतु एकत्रित हुए हैं।
वीर बाल दिवस का आयोजन प्रत्येक वर्ष 26 दिसम्बर को किया जाता है। कल से हमारे शीतकालीन अवकाश भी प्रारंभ होने जा रहे हैं।
वीर बाल दिवस के आयोजन की घोषणा हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री महोदय द्वारा 9 जनवरी 2022 में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर की गई थी।
इतिहास के पन्नों को पलटें तो हमें ज्ञात होता है कि 1704 ईस्वी में मुगल शासक औरंगज़ेब के आदेश पर मुगल सैनिकों ने आनंदपुर साहिब को घेर लिया था।
इस घटना के दौरान गुरु गोबिंद सिंह जी के दोनों छोटे पुत्र साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह एवं साहिबज़ादा फ़तेह सिंह को बंदी बना लिया गया।
उन्हें धर्म परिवर्तन कर इस्लाम स्वीकार करने का प्रलोभन दिया गया, लेकिन इन वीर बालकों ने अपने धर्म, सत्य और आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया।
इसके परिणामस्वरूप, इन दोनों मासूम लेकिन साहसी बालकों को ज़िंदा दीवार में चुनवा दिया गया।
कल्पना कीजिए, इतनी कम उम्र में भी उन वीर बालकों का आत्मविश्वास और धर्म के प्रति अटूट विश्वास आज भी हम सभी को गहराई से प्रेरित करता है।
यह बलिदान हमें यह सिखाता है कि साहस, सत्य और नैतिकता किसी उम्र के मोहताज नहीं होते।
इन्हीं वीर बालकों की अमर शहादत को नमन करते हुए हम प्रतिवर्ष वीर बाल दिवस मनाते हैं।
वीर बाल दिवस हम सभी विद्यार्थियों को यह संदेश देता है कि एक अच्छा छात्र वही है जो सत्य, अनुशासन और साहस को अपने जीवन का आधार बनाता है।
आइए, हम सभी यह संकल्प लें कि हम सदा सत्य के मार्ग पर चलेंगे, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करेंगे और देश व समाज के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देंगे।
अंत में, मैं आप सभी को वीर बाल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देती हूँ।




