School Management Committee (SMC) Guidelines 2026
विद्यालय प्रबंधन समिति 2026: सदस्य संख्या, गठन, संरचना, कार्य एवं दिशा-निर्देश
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आधिकारिक गाइडलाइन आधारित जानकारी | ApniGovt
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विद्यालय प्रबंधन समिति (School Management Committee – SMC) विद्यालय के संचालन, शैक्षणिक गुणवत्ता, विद्यार्थियों की उपस्थिति, विद्यालय विकास योजना, आधारभूत सुविधाओं और समुदाय की भागीदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने मई 2026 में SMC Guidelines 2026 जारी कीं।
इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य विद्यालय प्रबंधन में अभिभावकों, शिक्षकों, स्थानीय निकायों और समुदाय की भागीदारी बढ़ाना तथा बच्चों के लिए सुरक्षित, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वातावरण तैयार करना है।
📄 आधिकारिक SMC Guidelines 2026 PDF डाउनलोड करें- SMC क्या है और इसका उद्देश्य
- विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार समिति में कुल सदस्य
- 75% अभिभावक और शेष 25% सदस्यों का बँटवारा
- महिला एवं वंचित वर्ग का प्रतिनिधित्व
- अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य-सचिव
- गठन, चुनाव और कार्यकाल
- समिति के प्रमुख कार्य
- उपसमितियाँ और विद्यालय विकास योजना
- बैठक, रिकॉर्ड और पारदर्शिता
- महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
- आधिकारिक स्रोत
1. विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) क्या है?
SMC विद्यालय और समुदाय के बीच समन्वय स्थापित करने वाली समिति है। इसका उद्देश्य केवल विद्यालय की व्यवस्थाओं की निगरानी करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के नामांकन, नियमित उपस्थिति, सीखने के स्तर, समावेशी शिक्षा, सुरक्षा, विद्यालय विकास और जवाबदेही को बेहतर बनाने में योगदान देना भी है।
2026 की केंद्रीय गाइडलाइन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एक संदर्भ ढाँचा प्रदान करती है। इसमें विद्यालय स्तर पर सहभागितापूर्ण और जवाबदेह प्रबंधन पर जोर दिया गया है।
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2. विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार SMC में कुल कितने सदस्य होंगे?
केंद्रीय SMC Guidelines 2026 में समिति के सदस्यों की संख्या विद्यार्थियों के नामांकन के आधार पर लगभग तय करने की व्यवस्था दी गई है। आधिकारिक तालिका में संख्या को अनुमानित (Approximate) बताया गया है।
| क्रम | विद्यालय में विद्यार्थियों का नामांकन | समिति में सदस्यों की अनुमानित संख्या |
|---|---|---|
| 1 | 100 तक विद्यार्थी | 12–15 सदस्य |
| 2 | 100 से अधिक तथा 500 तक विद्यार्थी | 15–20 सदस्य |
| 3 | 500 से अधिक विद्यार्थी | 20–25 सदस्य |
3. समिति में 75% अभिभावक और शेष 25% सदस्य कौन होंगे?
केंद्रीय गाइडलाइन के अनुसार SMC की कुल सदस्य संख्या का 75% हिस्सा विद्यार्थियों के माता-पिता या अभिभावकों में से होना चाहिए। शेष 25% सदस्यों का चयन तीन श्रेणियों से बराबर हिस्सों में किया जाता है।
| क्रम | सदस्यों की श्रेणी | कुल समिति में निर्धारित हिस्सा |
|---|---|---|
| 1 | विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता/अभिभावक | 75% |
| 2 | स्थानीय निकाय के निर्वाचित प्रतिनिधि | शेष 25% का एक-तिहाई |
| 3 | विद्यालय के शिक्षक | शेष 25% का एक-तिहाई |
| 4 | स्थानीय शिक्षाविद, विषय विशेषज्ञ, शिक्षाविद/अकादमिक विशेषज्ञ, वरिष्ठ विद्यार्थी, पूर्व विद्यार्थी तथा संबंधित क्षेत्र के सामुदायिक कार्यकर्ता | शेष 25% का एक-तिहाई |
चौथी श्रेणी में कौन-कौन शामिल हो सकते हैं?
शेष 25% की तीसरी श्रेणी में केंद्रीय गाइडलाइन के अनुसार स्थानीय शिक्षाविद, विषय विशेषज्ञ, अकादमिक विशेषज्ञ, वरिष्ठ विद्यार्थी, विद्यालय के पूर्व विद्यार्थी और विद्यालय के आसपास के क्षेत्र में कार्यरत अग्रिम पंक्ति के सामुदायिक कार्यकर्ता शामिल हो सकते हैं। इनमें निम्न उदाहरण दिए गए हैं:
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (AWW)
- आशा कार्यकर्ता (ASHA)
- सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM)
- स्थानीय शिक्षाविद और विषय विशेषज्ञ
- विद्यालय के पूर्व विद्यार्थी और वरिष्ठ विद्यार्थी
स्थानीय निकाय की श्रेणी में संबंधित स्थानीय प्राधिकरण के निर्वाचित प्रतिनिधि आते हैं। केंद्रीय गाइडलाइन में स्थानीय प्राधिकरण के अंतर्गत लागू व्यवस्था के अनुसार नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायत, जिला परिषद या पंचायत जैसे निकायों का उल्लेख है।
4. महिलाओं और वंचित समूहों का प्रतिनिधित्व
समिति की संरचना में समावेशी प्रतिनिधित्व महत्वपूर्ण है। केंद्रीय SMC Guidelines 2026 में निम्न प्रावधान दिए गए हैं:
| क्रम | प्रावधान | क्या सुनिश्चित करना है? |
|---|---|---|
| 1 | महिला प्रतिनिधित्व | कुल सदस्यों में कम-से-कम 50% महिलाएँ हों। |
| 2 | सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित समूह (SEDGs) | लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार उचित/आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। |
| 3 | विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN) के अभिभावक | उनका प्रतिनिधित्व भी लागू प्रावधानों के अनुसार सुनिश्चित किया जाए। |
SEDGs में संबंधित सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित समूहों का प्रतिनिधित्व शामिल है। समिति बनाते समय केवल कुल संख्या पूरी करना पर्याप्त नहीं है; प्रतिनिधित्व संबंधी सभी लागू प्रावधानों का पालन भी जरूरी है।
“`html5. SMC के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य-सचिव कौन होंगे?
विद्यालय प्रबंधन समिति की संरचना में निम्नलिखित पदों एवं सदस्यों को शामिल किया जाएगा:
| क्रम | समिति के सदस्य | पद |
|---|---|---|
| 1 | माता-पिता/अभिभावक (निर्वाचित सदस्य) | अध्यक्ष |
| 2 | माता-पिता/अभिभावक (निर्वाचित सदस्य) | उपाध्यक्ष |
| 3 | विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के माता-पिता/अभिभावक | सदस्य |
| 4 | स्थानीय प्राधिकरण के निर्वाचित सदस्य | सदस्य |
| 5 | विद्यालय के शिक्षक | सदस्य |
| 6 | स्थानीय शिक्षा विशेषज्ञ/विषय विशेषज्ञ/शैक्षणिक विशेषज्ञ/विद्यालय के विद्यार्थी एवं पूर्व विद्यार्थी/आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (AWW)/मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (ASHA)/सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM) | सदस्य |
| 7 | प्राचार्य/प्रधानाचार्य/विद्यालय प्रभारी | सदस्य-सचिव |
अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष अभिभावक/माता-पिता के निर्वाचित सदस्यों में से होंगे। विद्यालय प्रमुख—प्राचार्य/प्रधानाचार्य/विद्यालय प्रभारी—समिति के सदस्य-सचिव की भूमिका निभाएगा।
“`अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन समिति की पहली बैठक में अभिभावक/माता-पिता सदस्यों में से चुनाव द्वारा किया जाता है। विद्यालय प्रमुख सदस्य-सचिव की भूमिका निभाता है। चुनाव और पदों की औपचारिक प्रक्रिया के लिए लागू गाइडलाइन तथा संबंधित राज्य के निर्देश देखना आवश्यक है।
6. समिति का गठन कब होगा और कार्यकाल कितना होगा?
- गठन की समय-सीमा: केंद्रीय गाइडलाइन के अनुसार शैक्षणिक वर्ष शुरू होने के एक महीने के भीतर SMC गठित की जानी चाहिए।
- चुनाव: चुनाव लोकतांत्रिक, पारदर्शी और समावेशी तरीके से कराए जाने चाहिए।
- पहली बैठक: गाइडलाइन में नई समिति की पहली बैठक अगले कार्यदिवस या गठन के बाद अधिकतम एक सप्ताह के भीतर आयोजित करने की व्यवस्था दी गई है।
- अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन: पहली बैठक में अभिभावक/माता-पिता सदस्यों में से किया जाता है।
- कार्यकाल: SMC सदस्यों का निर्धारित कार्यकाल दो वर्ष है।
7. विद्यालय प्रबंधन समिति के प्रमुख कार्य
SMC का उद्देश्य विद्यालय में शिक्षा और व्यवस्थाओं की गुणवत्ता सुधारने में सहयोग करना है। इसके प्रमुख कार्यों में निम्न विषय शामिल हैं:
7.1 नामांकन और नियमित उपस्थिति
- यह देखने में सहयोग करना कि क्षेत्र के सभी पात्र बच्चों का विद्यालय में नामांकन हो।
- बच्चों की नियमित उपस्थिति और पढ़ाई जारी रखने को प्रोत्साहित करना।
- लंबे समय तक अनुपस्थित रहने वाले बच्चों की समस्याओं को समझने और उचित सहयोग की व्यवस्था में योगदान देना।
7.2 शैक्षणिक गुणवत्ता
- विद्यार्थियों के सीखने के स्तर और शैक्षणिक प्रगति की समीक्षा में सहयोग करना।
- कमजोर विद्यार्थियों के लिए आवश्यक शैक्षणिक सहयोग पर चर्चा करना।
- विद्यालय में सीखने के अनुकूल वातावरण और सभी बच्चों के लिए समान अवसरों को प्रोत्साहित करना।
7.3 विद्यालय विकास योजना
- विद्यालय की आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों की समीक्षा में भाग लेना।
- कक्षाओं, पेयजल, शौचालय, भवन, दिव्यांग-अनुकूल सुविधाओं और अन्य आवश्यकताओं की पहचान करना।
- विद्यालय विकास योजना और उससे जुड़ी वार्षिक योजनाओं की तैयारी एवं समीक्षा में योगदान देना।
7.4 सुरक्षा और समावेशी वातावरण
- बच्चों की सुरक्षा और सम्मानजनक वातावरण से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना।
- बाल संरक्षण, भेदभाव-मुक्त वातावरण और शिकायतों के उचित समाधान को प्रोत्साहित करना।
- विशेष आवश्यकता वाले बच्चों और वंचित समूहों की शिक्षा में आने वाली बाधाओं पर ध्यान देना।
7.5 पारदर्शिता और जवाबदेही
- समिति की बैठकों, निर्णयों और आवश्यक अभिलेखों को व्यवस्थित रखने में सहयोग करना।
- विद्यालय की आवश्यकताओं और विकास संबंधी मुद्दों पर संबंधित प्राधिकारी के साथ समन्वय करना।
- विद्यालय के विकास और विद्यार्थियों के हित से जुड़े विषयों पर अभिभावकों और समुदाय की भागीदारी बढ़ाना।
ऊपर कार्यों का विषयवार सार दिया गया है। किसी कार्य, वित्तीय अधिकार या खर्च की सीमा को कानूनी रूप से लागू करने से पहले आधिकारिक गाइडलाइन और लागू विभागीय आदेश में संबंधित प्रावधान देखना चाहिए।
8. SMC की उपसमितियाँ
केंद्रीय गाइडलाइन में समिति के कार्यों को व्यवस्थित करने के लिए उपसमितियों की व्यवस्था दी गई है। इनमें प्रमुख रूप से निम्न उपसमितियाँ शामिल हैं:
8.1 विद्यालय भवन समिति (School Building Committee)
- विद्यालय भवन, निर्माण, मरम्मत और रखरखाव से संबंधित जरूरतों की समीक्षा करना।
- विद्यालय परिसर को सुरक्षित, बाल-अनुकूल और उपयोग के योग्य बनाने पर ध्यान देना।
- पेयजल, शौचालय, कक्षाओं और अन्य आधारभूत सुविधाओं से संबंधित समस्याओं को सामने लाना।
- निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की निगरानी और रिपोर्टिंग में निर्धारित भूमिका निभाना।
8.2 शैक्षणिक समिति (Academic Committee)
- शैक्षणिक गतिविधियों और विद्यार्थियों के सीखने की प्रगति की समीक्षा करना।
- शिक्षा की गुणवत्ता तथा समान अवसरों को बेहतर बनाने के उपायों पर काम करना।
- विद्यार्थियों की शैक्षणिक और विकास संबंधी जरूरतों पर चर्चा करना।
- विद्यालय की शैक्षणिक आवश्यकताओं और विकास योजना से जुड़े विषयों में योगदान देना।
9. बैठकें, कार्यवाही रजिस्टर और पारदर्शिता
SMC की बैठकें समिति के कामकाज, विद्यालय की आवश्यकताओं, विद्यार्थियों की प्रगति और विकास योजना की समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। समिति को लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार बैठकों और निर्णयों का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखना चाहिए।
- बैठक की सूचना और एजेंडा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तैयार किया जाए।
- बैठक में उपस्थित सदस्यों का रिकॉर्ड रखा जाए।
- चर्चा और लिए गए निर्णयों की कार्यवाही लिखी जाए।
- विद्यालय की जरूरतों और कार्यों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा की जाए।
- जहाँ लागू हो, समिति के निर्णयों और आवश्यक सूचनाओं को निर्धारित तरीके से सार्वजनिक किया जाए।
10. विद्यालय विकास योजना (School Development Plan)
विद्यालय विकास योजना विद्यालय की शैक्षणिक, भौतिक और अन्य आवश्यकताओं को व्यवस्थित रूप से पहचानने तथा प्राथमिकताएँ तय करने का महत्वपूर्ण साधन है। SMC इसमें सहयोग करती है और योजना की समीक्षा में भाग लेती है।
योजना तैयार करते समय आवश्यकता के अनुसार निम्न विषयों पर विचार किया जा सकता है:
- विद्यार्थियों के नामांकन और संभावित संख्या का आकलन।
- शिक्षकों और शैक्षणिक संसाधनों की आवश्यकताएँ।
- विद्यालय भवन, कक्षाओं, पेयजल, शौचालय और अन्य सुविधाओं की स्थिति।
- समावेशी शिक्षा और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की जरूरतें।
- शैक्षणिक गुणवत्ता और विद्यार्थियों के सीखने में सुधार की प्राथमिकताएँ।
- उपलब्ध संसाधन, वित्तीय आवश्यकताएँ और प्रस्तावित कार्य।
योजना की अवधि, वार्षिक उपयोजनाओं, हस्ताक्षर, प्रस्तुत करने की समय-सीमा और सार्वजनिक उपलब्धता संबंधी प्रावधानों के लिए आधिकारिक PDF में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करें।
11. SMC गठन के समय ध्यान रखने योग्य बातें
- विद्यार्थियों के नामांकन के आधार पर अनुमानित कुल सदस्य संख्या तय करें।
- 75% अभिभावक प्रतिनिधित्व और शेष 25% की तीन श्रेणियों का सही अनुपात रखें।
- कुल सदस्यों में कम-से-कम 50% महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करें।
- वंचित समूहों तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के अभिभावकों के प्रतिनिधित्व संबंधी नियमों का पालन करें।
- अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य-सचिव की भूमिकाएँ सही तरीके से निर्धारित करें।
- चुनाव और पहली बैठक निर्धारित समय-सीमा तथा लागू प्रक्रिया के अनुसार आयोजित करें।
- सदस्यों की सूची, बैठक की कार्यवाही और निर्णयों के अभिलेख व्यवस्थित रखें।
- राजस्थान में जारी नवीनतम आदेशों या निर्देशों से आवश्यक स्थानीय प्रक्रियाओं की पुष्टि करें।
12. SMC Guidelines 2026: महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. SMC Guidelines 2026 किसने जारी की हैं?
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने मई 2026 में School Management Committee Guidelines 2026 जारी कीं।
प्रश्न 2. 100 तक नामांकन वाले विद्यालय में कितने सदस्य होंगे?
केंद्रीय गाइडलाइन की अनुमानित तालिका के अनुसार 12 से 15 सदस्य। अंतिम संरचना में प्रतिनिधित्व संबंधी सभी प्रावधान भी पूरे होने चाहिए।
प्रश्न 3. 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले विद्यालय में कितने सदस्य होंगे?
केंद्रीय गाइडलाइन की अनुमानित तालिका के अनुसार 20 से 25 सदस्य।
प्रश्न 4. SMC में कितने प्रतिशत सदस्य अभिभावक होंगे?
कुल सदस्य संख्या का 75% हिस्सा विद्यार्थियों के माता-पिता या अभिभावकों में से होना चाहिए।
प्रश्न 5. शेष 25% सदस्यों का चयन किन श्रेणियों से होगा?
स्थानीय निकाय के निर्वाचित प्रतिनिधियों, विद्यालय के शिक्षकों और स्थानीय शिक्षाविदों/विषय विशेषज्ञों/अकादमिक विशेषज्ञों/वरिष्ठ विद्यार्थियों/पूर्व विद्यार्थियों/संबंधित सामुदायिक कार्यकर्ताओं की श्रेणी से, प्रत्येक को शेष 25% का एक-तिहाई हिस्सा दिया जाता है।
प्रश्न 6. समिति में कितनी महिलाएँ होनी चाहिए?
केंद्रीय गाइडलाइन के अनुसार कुल सदस्यों में कम-से-कम 50% महिलाएँ होनी चाहिए।
प्रश्न 7. SMC का अध्यक्ष कौन होगा?
माता-पिता/अभिभावक सदस्यों में से निर्वाचित व्यक्ति अध्यक्ष होगा। उपाध्यक्ष भी अभिभावक/माता-पिता सदस्यों में से चुना जाता है।
प्रश्न 8. SMC का सदस्य-सचिव कौन होगा?
विद्यालय प्रमुख—प्रधानाध्यापक/प्रधानाचार्य या लागू व्यवस्था के अनुसार विद्यालय प्रमुख—सदस्य-सचिव की भूमिका निभाता है।
प्रश्न 9. SMC का गठन कब किया जाना चाहिए?
केंद्रीय Guidelines 2026 के अनुसार शैक्षणिक वर्ष शुरू होने के एक महीने के भीतर समिति गठित की जानी चाहिए।
प्रश्न 10. SMC सदस्यों का कार्यकाल कितना है?
केंद्रीय Guidelines 2026 के अनुसार सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष है।
प्रश्न 11. क्या ये केंद्रीय गाइडलाइन ही राजस्थान का अलग सरकारी आदेश है?
नहीं। यह भारत सरकार की केंद्रीय गाइडलाइन है। राजस्थान में लागू स्थानीय प्रक्रिया, विभागीय निर्देश और किसी नवीनतम राज्य आदेश की पुष्टि अलग से करनी चाहिए।
13. आधिकारिक स्रोत एवं PDF
पाठक समिति की संरचना और नियमों की पुष्टि के लिए मूल दस्तावेज देखें:
- भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय: School Management Committee Guidelines 2026 – आधिकारिक PDF
- प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB): SMC Guidelines 2026 जारी होने की सरकारी प्रेस विज्ञप्ति
- राजस्थान के लिए: गठन/चुनाव से संबंधित नवीनतम आदेश के लिए राजस्थान स्कूल शिक्षा विभाग, समग्र शिक्षा राजस्थान या संबंधित सक्षम अधिकारी की आधिकारिक सूचना देखें।
शिक्षा संबंधी उपयोगी जानकारी के लिए जुड़े रहें — ApniGovt




